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40 साल के बाद कमजोर हो जाती हैं हड्डियां, करें ये आसन

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20 से 35 साल की उम्र के युवा लोग भी अब हड्डियों से जुड़ी बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। इन्डोर वर्क, असंतुलित लाइफस्टाइल, खानपान, स्मोकिंग और शराब का सेवन आज तेजी से जिंदगी का हिस्सा बन रहा है। 

40 वर्ष पूरे होने के बाद मसल्स ढीली होने लगती हैं जबकि हड्डियां कमजोर। इस उम्र में ऑस्टियोपोरेसिस होने का खतरा बढ़ जाता है जिससे हल्की सी चोट से भी हड्डी टूटने का डर बना रहता है मगर आपको घबराने की जरूरत नहीं। आज हम आपको कुछ आसान से आसन बताएंगे जो 40 के बाद भी हड्डियों को कमजोर नहीं होने देते।

धनुरासन-


उल्टा लेटकर व अपने दोनों पैरों को मोड़कर हाथ से पकड़ें और नीचे व ऊपर से खुद को स्ट्रेच करें। इसी अवस्था में 30-60 सेकंड तक रुकें और नीचे आ जाएं व दोहराएं। इस आसान के नियमित अभ्यास से ब्लड प्रेशर भी कंट्रोल रहता है।

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चक्रासन-

सबसे पहले पीठ के बल लेट जाएं और पैरों को घुटने से मोड़ें जिससे एड़ी हिप्स को छुए और पंजे जमीन पर हों। अब गहरी सांस लेते हुए कंधे, कमर और पैर को ऊपर की ओर उठाएं। इस प्रक्रिया के दौरान गहरी सांस लें और छोड़ें। फिर हिप्स से लेकर कंधे तक के भाग को जितना हो सके ऊपर उठाने का प्रयास करें। कुछ क्षण बाद नीचे आ जाएं और सांसे सामान्य कर लें।

उत्कटासन-

सबसे पहले पंजों के सहारे जमीन पर बैठ जाएं। हाथों को आगे की तरफ फैलाएं और उंगलियों को सीधा रखें। गला एकदम सीधा होना चाहिए। अब आप कुर्सी की पोजीशन में आ चुके हैं। 10 मिनट कतक इस मुद्रा में बने रहें।

भुजंगासन-

पहले पेट के बल सीधा लेट जाएं और दोनों हाथों को माथे के नीचे रखें। दोनों पैरों के पंजों को साथ रखें। अब माथे को सामने की ओर उठाएं और दोनों बाजुओं को कंधों के समानांतर रखें जिससे शरीर का भार बाजुओं पर पड़े। अब शरीर के ऊपरी हिस्से को बाजुओं के सहारे उठाएं। शरीर को स्ट्रेच करें और लंबी सांस लें। कुछ पल इसी अवस्था में रहने के बाद वापस पेट के बल लेट जाएं। 

पद्मासन-

जमीन पर बैठ जाएं। दायां पैर मोड़ें और दाएं पैर को बाईं जांघ के ऊपर कूल्हों के पास रखें। ध्यान रहे दाईं एड़ी से पेट के निचले बाएं हिस्से पर दबाव पड़ना चाहिए। बायां पैर मोड़ें तथा बाएं पैर को दाईं जांघ के ऊपर रखें। यहां भी बार्इं एड़ी से पेट के निचले दाएं हिस्से पर दबाव पड़ना चाहिए। हाथों को ज्ञानमुद्रा में घुटनों के ऊपर रखें। रीढ़ की हड्डी को बिलकुल सीधी रखें। धीरे-धीरे सांस लें और धीरे-धीरे सांस छोड़े। कम से कम 10 मिनट तक इस मुद्रा में रहें।

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वृक्षासन-

पेड़ की तरह तनकर खड़े हो जाइए। शरीर का भार अपने पैरों पर डाल दीजिए और दाएं पैर को मोड़िये। दाएं पैर के तलवे को घुटनों के ऊपर ले जाकर बाएं पैर से लगाइये। दोनों हथेलियों को प्रार्थना मुद्रा में लाइये। अपने दाएं पैर के तलवे से बाएं पैर को दबाइये और बाएं पैर के तलवे को ज़मीन की ओर दबाइये। सांस लेते हुए अपने हाथों को सिर के ऊपर ले जाइये। सिर को सीधा रखिए और सामने की ओर देखिये। 20 मिनट तक इस स्थिति में रुके रहें।


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